“तुम”

तुम्हारी और मेरी ये कहानी है सालों पुरानी, तुम अटूट हिस्सा हो मेरी जिन्दगी का, हमेशा से ही ये बात मैने है मानी| मेरा पीछा न छोङने की तुमने भी है ठानी| जब-जब मौसम ने ली अंगङाई, तुम्हे  याद मेरी आई| तुम्हारे आने का अन्देशा मुझे पहले ही हो जाता है, हमारा ये अलग सा… Continue reading “तुम”

“घड़ी”

वो भी एक घड़ी थी, अपनी सखियों के संग मैं पर्दे के पीछे पड़ी थी। एक अजनबी की तलाश मे हर क्षण साठों बार नजरें घुमाती  थी। यह तो साई को भी सताई जब मुझ पर गर्द जम आई, एक दिन मेरा श्वेत रंग देखते ही मैं तुम्हे भाई। हर परिमाप पर परखने के बाद, सबके… Continue reading “घड़ी”

“तुम”

तुम न हो तो जीना बेमानी है, यह बात मैंने हमेशा से मानी है। तुम्हारे बिन मेरी हर कहानी है अधूरी, जैसे बिन तीखी चटनी की पानी पूरी। मेरे हर सुख दुख के साथी हो तुम, मेरा हर राज जानने वाले हो तुम। वह कौन सा किस्सा है मेरा जो तुम नहीं जानते, वह कौन… Continue reading “तुम”

Do you like your school days?

So here is my first attempt towards reverse poetry! Reverse poetry- when read from top to bottom, it gives opposite meaning!!!! Do you like your childhood days? I think everybody does. Do you hate your school days? At least i never undertake this way! Childhood is the glorious era of our whole existence You are not… Continue reading Do you like your school days?

Loud is fall of a tree, louder is the fall of a lion! But the loudest of all is, fall of haughty pride!!

चारों तरफ सन्नाटा! हमेशा अपने चरम पर रहने वाले शोरगुल को न जाने किसकी नज़र लग गई थी| कोने-कोने पर वर्षों से एक ही मुद्रा मे खड़ी मूर्तियों को भी लगा की आज उन्हे कई नये साथी मिल गए हैं | दिन हो या रात, हर समय चमकने वाले उस महल को आज मुश्किल से… Continue reading Loud is fall of a tree, louder is the fall of a lion! But the loudest of all is, fall of haughty pride!!