“तुम”

तुम्हारी और मेरी ये कहानी है सालों पुरानी,
 तुम अटूट हिस्सा हो मेरी जिन्दगी का,
 हमेशा से ही ये बात मैने है मानी|
 मेरा पीछा न छोङने की तुमने भी है ठानी|

 जब-जब मौसम ने ली अंगङाई,
 तुम्हे  याद मेरी आई|
 तुम्हारे आने का अन्देशा मुझे पहले ही हो जाता है,
 हमारा ये अलग सा ही नाता है|

 जब तुम मौजूद होते हो,
 तो इत्र की पूरी बोतल भी बूँद सी लगती है,
 कहना तो बहुत कुछ चाहती हूँ, पर कह ही नहीं पाती हूँ|
 मानो मेरी तो पूरी दुनिया ही बदल जाती है।

 चार लोगों के संग मैं बैठ न पाती हूँ,
 हर थोङे समय बाद मुँह छिपाकर चली जाती हूँ।
 ऐसा क्या तेज है तुममें कि
 तुम्हारे आते ही मेरी साँसें थम जाती हैं,
 न जाने क्यों बार-बार आंखें लाल होकर भर आती हैं|

 तुम हर बार ले लेते मेरी जान हो,
 पर तुम्हे ज्यादा तरजीह देना भी ठीक नहीं,
 अखिर तुम और कुछ नहीं, मेरा जुकाम हो|
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